
एक ऐसी स्त्री, जिसमें दृढ़ नैतिकता, सच्चाई और आचरण में धर्मनिष्ठा हो।
एक ऐसी स्त्री, जो उच्च नैतिक मूल्यों का पालन करती हो।
एक ऐसी स्त्री, जो प्रेम, ममता से परिपूर्ण हो ,
सहानुभूतिपूर्ण, दयालु, मेहनती, दूरदर्शी, नए रुझान बनाने वाली और बदलाव लाने वाली हो;
जो बहु–प्रतिभाशाली हो और अपने संघर्षों को स्वयं ही संभालती हो; जो दुष्ट प्रवृत्ति वाली महिला द्वारा भेजे गए संघर्षों का सामना अकेले करती हो;
जो बार–बार शून्य से शुरुआत करती हो, साथ ही साथ अपने आसपास की आत्माओं को सहारा और उपचार देती रहती हो
और हमेशा स्वयं को सबसे अंत में रखती हो।
जब ऐसी स्त्री पर इन्ही गुणों के कारण झूठे आरोप लगते हैं और राजनीति, प्रपंच, छल कपट के जाल बिछाए जाते हैं
वो पीड़ा प्रसव पीड़ा से भी हज़ार गुना पीड़ा दायक होती है ।
यह पीड़ा मिलती है
उस स्त्री से जिसका व्यक्तित्व एकदम विपरीत है और उसको बर्दाश्त नहीं होता की तुम उसके जैसी स्त्री नहीं हो ,
तुम्हारे अस्तित्व के आगे उसके नक़ाब के पीछे का असली चेहरा सामने आने लगता है । वो तुम्हारे जैसा ख़ुद को दिखाना चाहती है और तुम्हें वो आरोपों के बोझ में दबा देना चाहती है जो आरोप उसकी सच्चाई है।
प्रसव पीड़ा से संतान का सुख मिलता है वो अलग बात है की कुछ स्त्रियाँ संतान पाकर भी ममता और निस्वार्थ प्रेम से रहित रह जाती हैं, वो आत्ममुग्धता के अलावा कुछ नहीं जानती – संतान को भी पूरे जीवन उनके दूध का कर्ज़ ही चुकाना होता है।
दूसरी पीड़ा से अथाह दुख मिलता है
लेकिन जब आपके व्यक्तित्व की जड़े मज़बूत होती हैं तो यह दुख भी प्रकाश बनकर दूसरों को राह दिखाता है
इन अत्याचारों की पीड़ा से जो विचार जन्म लेते हैं , कला जो और निखर जाती है
इन विचारों , इन कलाओं को उसका कोई कर्ज़ नहीं चुकाना होता है।
गुणवान स्त्री, प्रेम से भरी स्त्री तो बस प्रेम और इस कला को बाँटना चाहती है
क्योंकि वो जानती है यह ईश्वर का वो प्रसाद है
जिसे बाँटने के लिए ईश्वर ने उसके हृदय,
उसकी बुद्धि ,
उसकी क़लम,
और उसकी आवाज़ को चुना है ।



